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ये मंज़र मौत का तांडव जो देखा वो ही जाने देव

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चले गए छोड़ कर दुनियाँ यहाँ जब देखते होंगे।।
        
                                                    
                            
क्या पाया यां क्या खोया यही सब सोचते होगें।।

लिपटना यादों से रातों में बदलना करवटें यूँ ही,,
तसव्वुर में सितारों से बस हक़ीकत देखते होंगे।।

कहाँँ कौन साथ देता है सब मतलब के साथी है,,
दिलों से दिल के धोखें है यही सब सोचते होगें ।।

नज़र का खेल है सारा वगरना क्या बुरा अच्छा,,
बुराई और भलाई का समंदर बस देखते होंगे।।

रहिमन रहमतुल्ला है तो क्या डरना अँधेरों से,,
नहीं उसका कोई सानी के सख़ावत देखते होंगे।।

क्या गुज़री है उनपे जिन्होंने खो दिया सब कुछ,,
न होना कुछ तबाही का यही सब सोचते होगें ।।

ये मंज़र मौत का तांडव जो देखा वो ही जाने देव,,
कहाँ है जिंदगी आज ग़ुम यही सब सोचते होगें।।
-सुनील देव
एक घंटा पहले
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