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बनो मेरी तो इस क़दर

Sajal Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसा राज़ बनो मेरा जो ज़ाहिर न हो
        
                                                    
                            
बनो ऐसा एहसास जो खत्म न हो
अगर बनो आग
तो जलो इस कदर
की बुझे ही ना
अगर बनो तो समंदर
इस कदर
की उफान आता रहे
अगर तुम बनो आसमान
तो बनो इस कदर
की सारे रंगों को समेटकर
बस प्यार का रंग हो
जिसे देखने को हम तरसे
और तुम मुस्कराओ दूर से
फूल बनो
तो इस कदर
की कभी मुरझाये ना
अगर बनो तुम मेरी
तो बनो इस कदर
जैसे संगीत में गीत
जैसे समंदर की लहरें
जैसे बिजली में इलेक्ट्रॉन
जैसे आसमान में तारे
जैसे जंगल में पेड़
जैसे कोयल का गीत
जैसे संगीत में सुर
जैसे नदियों में ठहराव
जैसे पंछी का चहचहाना
जैसे गायक का गुनगुनाना
जैसे कवि की कविता
जैसे वीणा की धुन
जैसे बांसुरी में बांस
जैसे मैदान में घास
जैसे माला में मोती
जैसे कुर्ता और धोती
बस तुम ही तुम हो
मुझमें समाई हुई
कुछ इस कदर
की जिंदगी तुमसे हो
और तुम ही जिंदगी हो
7 घंटे पहले
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