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भीगे लम्हों की ख़ुशबू

SACHIN PRAJAPATI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भीगे होंठों पर मुस्कान की चिंगारी थी,
        
                                                    
                            
हर हँसी में छुपी इक प्यारी सी बीमारी थी।

तेरे बालों से गिरी हर बूंद में नशा था,
हर झोंके में तेरी याद की खुमारी थी।

तेरा स्पर्श पड़ा तो साँसें थम गईं,
दिल ने कहा — यही तो इश्क़ की तैयारी थी।

एक नज़र में वक़्त रुक गया,
जैसे खुदा ने बनाई ये मनोहर क़िश्ती प्यारी थी।

जो पल तेरे संग बिता, अमर हो गया,
उसमें हर सदी की मदहोशी उतारी थी।

न कोई आवाज़, न कोई सवाली चेहरा,
बस रूह से रूह तक एक जारी थी।

वो बारिश, वो ठंडी हवा, वो चाँदनी रात —
हर लम्हा तेरे नाम की सफारी थी।
-सचिन प्रजापति
11 महीने पहले
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