विज्ञापन

शौर्य का प्रण: शहीदों को नमन

SACHIN PANDEY

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न सुख की तमन्ना, न धन लेके लौटे,
        
                                                    
                            
हृदय में वतन की लगन लेके लौटे।
नमन है शहीदों के उस शौर्य को जो,
वतन की हिफ़ाज़त का प्रण लेके लौटे॥

जिन्होंने मिटाई है अपनी जवानी,
लिखी खून से है वतन की कहानी।
झुका शीश सारा ये भारत नमन दे,
बहाकर के आँखों से श्रद्धा का पानी॥

कदम सरहदों पर जो डगमग न पाए,
दिए प्राण हँसकर तिरंगा न जाए।
सदा कर्जदार उनका ये देश रहेगा,
शहादत का परचम जो ऊँचा उठाए॥

वतन के लिए जो जवानी लुटा दे,
जो शोले को छूकर के पानी बना दे।
सदा शीश अपना झुकाते हैं उसको,
जो भारत के माथे पे चन्दन लगा दे॥

न घर-बार छूटा तो हिम्मत वो हारे,
वतन के लिए सारे सुख हैं गुजारे।
सदा याद रखेगा भारत हमारा,
तिरंगे पे हँस के जो प्राणों को वारे॥
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile