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माँ का प्यार

Rupendra Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ ने हमको जनम दिया
        
                                                    
                            
कितने अरमानों से पाला है,
जब भी रोता बचपन में
लोरी गाकर सुलाया है !!

पहला कदम चलना
माँ ने हमें सिखाया है,
कभी खुद भूखी रहकर
रोटी हमें खिलाया है !!

धूप में सदा काम करते
छाँव में हमें बिठाया है,
जीवन का पाठ पढ़ाकर
आगे बढ़ना सिखाया है !!

कितनों दुख सहा है माँ
पर कुछ नहीं बताया है,
सपनों को पूरा करने
अपना पूरा जीवन लुटाया है !!

जब भी मुसीबत आया है
माँ को ढाल बनते पाया है,
तभी तो जग में ईश्वर ने
माँ के सामने सिर झुकाया है !!

उपकार बहुत है माँ के
पर कभी नहीं जताया है,
तभी तो इस दुनिया में
माँ के रिश्ते को बड़ा बताया है !!

रूपेद्र कुमार ✍️
ग्राम - भेंडरी 🍃
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