“मेरी मौत में शामिल,
वो दिलनशीं हमारा है ,
सजा-ए-माफ़ दे-दो उनको
गुनाह-ए-दिल हमारा है,
मिज़ाज-ए-क़ातिल हैं जो
है क़सूर क्या उनका?
ख़ता नज़रों की है मेरी
मुझे मेरे दिल ने मारा है।”