“संजोऊँगा मैं कुछ अधूरे से सपने,
लिख राधा तुझे गीत ग़ज़लों में अपने.!
लौट गोकुल मैं आऊँ बुलाओ जो तुम
बेशर्त अपना मुझे बनाओ जो तुम,
निधिवन में भर रंग फूल पत्ते बनूँ मैं
अपने अधरों से बसंत पुकारो जो तुम,
वचन वो निभाओ जो निभाये न तुमने
संजोऊँगा मैं…..
लिख राधा तुझे गीत ग़ज़लों में अपने..!”