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नायक :-मैं कोई नायक नहीं

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह कहता है मैं कोई नायक नहीं,
        
                                                    
                            
पर्दे का केवल एक अदाकार हूँ।
तारों से सजी उस दुनिया का,
मैं तो बस एक छोटा सा किरदार हूँ।

मत पहनाओ मुझे मसीहा का ताज,
मैं तो तुम्हारे जैसा ही एक आम हूँ।
दुख देख जो पिघल जाए अपनों का,
मैं बस उसी तड़प का एक नाम हूँ।

जब रास्ते बंद थे, घर दूर था,
वो बनकर चला एक साया साथ।
बिना किसी रथ या जादुई शक्ति के,
उसने थाम लिया हर बेबस का हाथ।

वह सुपरहीरो की तरह उड़ता नहीं,
न ही उसके पास कोई चमत्कारी तीर है।
पर जो रोते हुए को गले से लगा ले,
वही तो इस कलयुग का असली वीर है।

नायक वो है जो बस स्क्रीन पर चमके,
पर इंसान वो है जो दिलों में घर कर जाए।
खुद को आम कहकर जो खास बन गया,
दुआ है उसकी सादगी कभी कम न हो पाए।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
2 महीने पहले
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