मुश्किलें राहों में आती ही रहेंगी
धड़कनें मंज़िल सुनाती ही रहेंगी
धूप जितनी भी कड़ी हो राह में अब
हिम्मतें साया बनाती ही रहेंगी
बात दिल की साफ़ कहना सीख जाओ
झूठ की यादें डराती ही रहेंगी
जीत का सूरज उगेगा एक दिन अब
क़िस्मतें सबको जगाती ही रहेंगी
छोड़ 'नादिर' फ़िक्र तू अब कल की प्यारे
मंज़िलें रस्ता दिखाती ही रहेंगी
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'