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अत्याचार चरम पर है

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अत्याचार चरम पर पहुँचा, न्याय यहाँ अब मौन खड़ा,
        
                                                    
                            
हर खंभे में ढोंग छुपा है, पाखंडों का जाल बड़ा।
आज व्यवस्था सोई है और पीड़ित रोता सड़कों पर,
चीख रही है अवाम कि कोई 'नरसिंह' फिर से प्रकट करो।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
एक महीने पहले
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