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अमर शहीदों का महासंग्राम

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चूमा था फांसी का फंदा, गूंजी थी जब सिंह-पुकार,
        
                                                    
                            
काँप उठा था गोरा शासक, थर-थर काँपी थी सरकार।
भगत, राजगुरु और सुखदेव, क्रांति के वो अनमोल रतन,
मातृभूमि की बलिवेदी पर, हँसकर वार दिया यह तन।

नारा गूंजा इंकलाब का, सोई रूहें दीं झकझोर,
दौड़ पड़ी आज़ादी की लू, पूरब-पश्चिम चारों ओर।
तोप-तमाचों से ना डरते, सीना ताने वीर जवान,
भारत माँ के अंचल पर ही, लिख डाला अपना बलिदान।

भूख-प्यास और कोड़े खाए, हँसती थी वो मस्त जवानी,
काल-कोठरी के पन्नों पर, लिखी शौर्य की अमर कहानी।
फांसी की उस अंतिम रात भी, गाते थे आज़ादी गान,
रग-रग में था देश बसा और मुख पर थी माँ की जय-तान।

लहू बहाकर पावन करके, दे गए हमको मुक्त विहान,
इतिहासों के माथे पर वो, जड़ गए अपना अमिट निशान।
माटी का हर कण आज भी, गाता है उनका ही नाम,
शीश झुकाकर करता है यह, सारा भारत उन्हें प्रणाम।

चले गए वो देकर हमको, आज़ादी का खुला अकाश,
बनकर चमके अंबर पर वो, बुझने ना पाए जो प्रकाश।
गोरों की बंदूकों के आगे, सीना तान खड़े थे वीर,
काट दिया अपनी ताकत से, सदियों की सुदृढ़ जंजीर।

जलियांवाले बाग की माटी, गवाह बनी उस लाली की,
कीमत चुकाई इन वीरों ने, इस पावन हरियाली की।
उम्र अट्ठाइस की खिलती थी, पर देश प्रेम का ज्वार बड़ा,
मौत सामने खड़ी देखकर, हर इक योद्धा तान खड़ा।

इंकलाबी वो मतवाले थे, अद्भुत था उनका उन्माद,
हँसते-हँसते सह लेते थे, सारे जुल्म और अवसाद।
गोली खाई सीने पर ,पर हाथ से झंडा गिरा नहीं,
मरते दम तक कदम वीर का, पीछे कभी हटा ही नहीं।

अमर ज्योति बन जलते हैं वो, देश-भक्ति के मंदिर में,
शौर्य उनका लहराता है, आज भी जन के अंतर में।
सच्ची आज़ादी यह महके, ऊँचा रहे हमारा पावन
अमर शहीदों के चरणों में, कोटि-कोटि भारत का प्रणाम।

आज पंद्रह अगस्त का दिन है, फहराता तिरंगा प्यारा,
याद दिलाता उन वीरों की, गूंज रहा है आज जयकारा।
आज़ादी का यह पावन दिन, भेंट उन्हीं की लाया है,
वीर शहीदों के लहू से, चमन हमारा मुसकाया है।

आओ मिलकर कसम यह खाएं, व्यर्थ न जाने देंगे त्याग,
हर दिल में सुलगाकर रखेंगे, देश-भक्ति का पावन राग।
जब तक गंगा-यमुना बहती, याद रहेगा उनका नाम,
कोटि-कोटि नमन है उनको, वीर शहीदों को प्रणाम।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
एक महीने पहले
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