विज्ञापन

राजनीति के प्रणब दा

Ritesh tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बंगाल के छोटे गांव से निकल कर।
        
                                                    
                            
जिसने देश को राजनीति का पाठ पढ़ाया।।
आज अकेला छोड़ के सबको उसने।
अपने अंतिम मार्ग पे कदम बढ़ाया।

आज़ादी के दौड़ को जिसने।
अपनी आंखों से था देखा।
नव भारत के निर्माण में उसने।
अपना अहम योगदान निभाया।

कांग्रेस की नींव पे जिसने।
अपने नाम का दीवार बनाया।
जब लड़खड़ा रही थी एक मोड़ पे पार्टी।
तब अपनी सूझ बूझ से नया मुकाम दिलाया।

देश सेवा में संलग्न रहे ये सदा।
अपनी जिम्मेदारी को खूब निभाया।
पाँच दशक देखे राजनीति में जिसने।
अपने दायित्व को भलीभांति निभाया।

पक्ष विपक्ष जो भी हो चाहे।
हर किसी ने इनको खूब सराहा।
मार्गदर्शक बन खड़े रहे राजनीति में।
तभी तो सभी ने प्रणब दा कह के पुकारा।

राष्ट्रपति बन राष्ट्र के अपने।
प्रथम भारतीय का अधिकार था पाया।
भारत रत्न पास था इनके।
अपनी प्रतिभा का सदैव परचम लहराया।


-- रितेश तिवारी


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

sunil kumar

181 कविताएं

View Profile

Anita Chaturvedi

161 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

578 कविताएं

View Profile