राम विकल युद्ध सकल
चिंतित चित,हुआ संग्राम अब
दसकंधर सशक्त,विदीर्ण हुई अब
सकल वानर सेना जब,
व्योम में रक्त रंजित
धरा लाल हुई लोहित,
धर राम कोदंड उठा
शास्ति दे दशशिर मरण ॥१॥
उठो राम रघुपति राघव
करो दुष्ट दलन,
विशिख शिखर से
अब बाण चला,
संध्या विकल छाया है निशांधकार
वानर भालू हुए विकल,
कल सकल युद्ध है अंतिम दिवस,
राम व्याकुल सीता स्मरण
सजल नेत्र हृदय शूल ॥२॥
लखन अनुरागी पड़े चरण में
है आशीष असुरारि,
विजय हमारी है निश्चित स्मरण
रावण का है अंतिम चरण,
धीरज धरो हे प्रिय भ्राता,
कल साक्षी होगा सूर्य-सोम
जय घोष है अजय धर्म सदा
यह प्रियवर स्वप्न सदा ॥३॥