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बलिदानों की कहानी

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मरकर हैं जो दिलो में जिंदा, ऐसे अपने वीर।
        
                                                    
                            
त्याग,तपस्या, सहनशील का जिनमें भरा है धीर।
वीर ............................ ऐसे अपने वीर ।

पावन भूमि को मां समझें,चंदन जैसी धूल।
लाड लड़ाए भूमि,तिलक करे है धूल।
खड़ा देश जिनके बल पर, वहीं बंधे जंजीर।
त्याग , तपस्या, सहनशील ................. धीर।
वीर ............................... ऐसे अपने वीर।

छोड़ पिता को बिस्तर पर,बिन ब्याही बहन बिठाए।
मात बिलखती छोड़ गए वो, भारत माता हित जाएं।
छोड़ हजारों फर्ज गए वो,केवल अपनी तक़दीर।
त्याग, तपस्या, सहनशील ..................... धीर।

देश की भक्ति से बढ़कर,दूजी कोई भक्ति ना।
देशसेवा से जग की सेवा,बिन इसके मिलती मुक्ति ना।
आपस में फिर बैर करें क्यों,लिए खड़े शमशीर।
त्याग, तपस्या, सहनशील......................... धीर।

मरकर हैं जो दिलों में जिंदा,ऐसे अपने वीर।
त्याग, तपस्या, सहनशील का जिनमें भरा है धीर।
वीर ..............................ऐसे अपने वीर।
2 महीने पहले
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