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पलक झपकते

Anonymous User

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                            पलक झपकते
        
                                                    
                            
जीवन गुजर जाएगा,
पल दो पल का बसेरा है,
मिट्टी से आया है,
मिट्टी में मिल जाएगा।

मौका न चूक,
चल थोड़ा खेल ले,
खुद को भी देख ले।

तू ही मिट्टी,
तू ही आसमाँ,
तू ही हवा
और
तू ही प्रकाश है।

तू लुटेरा नहीं,
कोई चोर नहीं और
अपना कोई घर भी नहीं।
फिर बता—
कहाँ और कैसे
ले जाएगा...?

मिट्टी से आया है,
मिट्टी में मिल जाएगा।
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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