झूमते-नाचते हुए ख़ुद को
मैंने देखा है।
रोते-तड़पते हुए भी ख़ुद को
मैंने देखा है।
कसम से,
कभी अपनी ही नज़रों से
ख़ुद को निहारकर देखना,
ख़ुद को संभालकर देखना—
इसमें कितना आनंद होता है,
मैंने देखा है।
ख़ुद से प्रभावित होना,
ख़ुद पर ही प्यार बरसते देखना—
इसके लिए
थोड़ी तैयारी करके देखना,
थोड़ा ख़ुद को समझकर देखना।
इसमें कितना आनंद होता है,
मैंने देखा है।
कभी अपने ही साथ
एक छोटी-सी महफ़िल सजाकर देखना,
बिना किसी वजह मुस्कुराकर देखना,
ख़ामोशी के साथ बैठकर देखना—
कितना सुकून होता है,
मैंने देखा है।
अपने ही पास रो कर
खुद को कंधा देकर देखना
एक बार खुद को
गले लगाकर देखना
कितना सुकून होता है
मैने देखा है।