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जलती हुई रात है, मत देख

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आने वाले मौसम की बिजलियाँ मत देख,
        
                                                    
                            
अभी मेरे समंदर को बहुत प्यास है, मत देख।

कैसे कह दूँ साहिल से कि तू दूर चला जा,
अभी लहरों के सीने में तेरी आस है, मत देख।

आकाश में तितलियाँ घेर के बातें करेंगी,
हवा के हर क़दम पर कोई नई बात है, मत देख।

जो ख़्वाब तेरी आँखों में अभी पल रहा है,
उसे धूप से बचा, उसमें अभी बरसात है, मत देख।

मैं रेत पर लिखता हूँ समंदर की कहानी,
हर लफ़्ज़ में छुपी एक अधूरी-सी बात है, मत देख।

तू चाँद समझता है जिसे रात के आँचल में,
वो मेरी ही आँखों में जलती हुई रात है, मत देख।

बहुत दूर तक जाना है मुझे अपनी रवानी में,
अभी रास्ते में तूफ़ानों की सौग़ात है, मत देख।
-रतन कुमार कैथवास
2 घंटे पहले
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