मनुष्य को उसकी आत्मा तब तक महसूस कराएगी कि वह है बस एक साधारण जंतु,
मनुष्य चाहे जितना भी तरक्की कर ले उसके जीवन में तब तक लगा रहेगा किंतु परंतु,
जब तक कि वह सत्य स्वरूप ज्ञान स्वरूप एवं आनंद स्वरूप ईश्वर के पास पहुंचाने वाले,
धर्म के मार्ग को स्वीकार नहीं लेता तथा उससे जोड़ नहीं लेता अपने मन हृदय का तंतु|
-मनस्व