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तब शायद आज इतना...

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज जब प्रऔढ़ अवस्था में मेरी शरीर की शक्तियां,
        
                                                    
                            
धीरे-धीरे कमज़ोर होने लगी हैं,
मैं आगे की ओर कुछ कुछ लचकने हूं,
चेहरे पर कुछ कुछ झुर्रियां सी पड़ने लगी हैं,
तब मुझे एहसास हो रहा है कि,
यह मेरा शरीर मुझे धोखा दे रहा है,
काश यह बात मैं तब ही समझ लेता,
जब यह मेरा शरीर धीरे-धीरे बढ़ रहा था,
जब यह मेरा शरीर धीरे-धीरे मजबूत हो रहा था,
जब यह मेरा शरीर धीरे-धीरे आसमान को,
छूने की कोशिश कर रहा था,
सचमुच यह मुझे तब भी धोखा ही दे रहा था|
तब शायद आज इतना...

-मनस्व
16 घंटे पहले
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