जो भारत था कभी सोने की चिड़िया और यहां नारी के अंग रहते थे गहनों से लदे,
और यहां पुरुष भी अपने आन मान सम्मान के लिए अखाड़े में बराबर फेरता था गदे,
वही आज का भारत भुलाकर सब अपनी सभ्यता संस्कृति के कानून और कायदे,
पश्चिमीवाद और आधुनिकता के नाम पर अश्लीलता और नंगापन की पार कर रहा सभी हदे|
-मनस्व