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एक लोकगीत

Ramesh Raj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टम्पू बारौ एक रुपइया ज्यादा लैग्यो लांगुरिया” ||
        
                                                    
                            
बा रुपया ते लाबती नीले-पीले रंग
जमि कैं होली खेलती सैंया जी के संग,
टम्पू बारौ एक रुपइया ज्यादा लैग्यौ लांगुरिया।

एक रुपइया के बिना बिगरे कैसे काम
गुदवा लेती बांह पै सैंयाजी कौ नाम,
टम्पू बारौ एक रुपइया ज्यादा लैग्यौ लांगुरिया।

टम्पू बारे की भयी नीयत खूब खराब
बा रुपया ते रात कूं पीवै मुंओ शराब,
टम्पू बारौ एक रुपइया ज्यादा लैग्यौ लांगुरिया।

रपट लिखाने मैं गयी बौल्यौ थानेदार
लै-लै दस कौ नोट तू करि लै मोते प्यार,
टम्पू बारौ एक रुपइया ज्यादा लैग्यौ लांगुरिया।

लांगुर तेरे देश में लूटें बेईमान
जानि-बूझि कैं मति बनै नेता-सौ अन्जान
टम्पू बारौ एक रुपइया ज्यादा लैग्यौ लांगुरिया।

तबहि चढ़ाऊँ नारियल तबहि चढ़ाऊँ फूल
काटै गर्दन दुष्ट की मैया कौ तिरशूल
टम्पू बारौ एक रुपइया ज्यादा लैग्यौ लांगुरिया।
-रमेशराज
एक महीने पहले
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