विज्ञापन

एक गीत

Ramesh Raj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक गीत-
        
                                                    
                            
बिना ध्येय के रक्तपात को आतुर बन बैठे,
आज हमारे चाकू यारो हम पर तन बैठे।

हमने छुरियों को समझाया उनका कत्ल करें
कविताओं में अपराधी-से जो विचार विचरें
पर छुरियों के फलक सत्य के खूं में सन बैठे
आज हमारे चाकू यारो हम पर तन बैठे।

आग बनाकर हमने भेजा चूल्हों तक जिनको
वे कर आये राख हजारों बहुओं के तन को
खुशियों के संदर्भ असीमित पीड़ा जन बैठे,
आज हमारे चाकू यारो!हम पर तन बैठे।

जिनके अधरों पर थीं बातें केवल सतयुग की
‘राजा शिबु’ जैसे लोगों की आज परीक्षा ली
जिबह कपोतों की ही वह तो कर गर्दन बैठे,
आज हमारे चाकू यारो हम पर तन बैठे।
-रमेशराज
14 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kahar

5 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

385 कविताएं

View Profile