तितली रही न थान पर कभी
फूल वहीं खड़ा है,
फिर भी संबन्ध दोनों का
अटूट हमेशा रहा है,
ज़रूरी नहीं कि धर्म, ज़ात,
और नैन-नक्श एक हों,
जीवन में आपसी सहयोग का
महत्व सचमुच बड़ा है.