तुझे उठने के लिए मुझे गिराना पड़ा
अरे ज़ालिम,
क्या तुझमें इतना भी साहस नहीं था
कि तू बिना किसी को गिराए उठ सकता?
तुझमें इतनी ताक़त तो होनी चाहिए थी
कि तुझे झूठ का सहारा न लेना पड़े,
मगर अपने आपको ऊँचा दिखाने के लिए
तूने इल्ज़ाम लगाने में कोई कसर न छोड़ी।
तू बड़ा अहंकारी था,
तो सच की राह पर चलता,
फिर देखते तेरी ताक़त कितनी थी।
लेकिन तेरी ताक़त भी देख ली मैंने—
मुझे गिराकर भी
तू वहीं का वहीं रह गया।
तूने सोचा होगा,
“साला मर गया,
अब इसकी वापसी की कोई उम्मीद नहीं।”
मगर शायद तुझे यह मालूम न था
कि जिसे तू ख़त्म समझकर गया है,
वही एक दिन
तेरे सामने फिर ज़िंदा खड़ा होगा।
आज मुझे ज़िंदा देखकर
अगर तेरी रूह काँपती है,
तो मेरे लिए
इतना ही काफ़ी है।
तूने मुझे गिराने में
अपनी पूरी ताक़त लगा दी,
और मैंने उठकर
तेरी पूरी औक़ात देख ली।
— रजनी