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मन के घाव

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने-आप ठीक,
        
                                                    
                            
कभी कुछ होता है क्या?

थोड़ी-बहुत ढील,
किसी को भगवान देता है क्या?

मैं क्यूंकि,
सख़्त ज़रूरतमंद हूं

'सभी हैं समान'
'क्यों मुझपे एहसान?'

ऐसी बातें... बंद करो 🙏

अब,
मेरा ही हिस्सा है...

वो... खोट मेरा :(

या, यूं बार-बार कहा है...
और उस चोर ने दिया डेरा?

अच्छे, धुले... सपनों को... दूर फेंका...

एक बेअक़्ल, ढूंढने चला था... समझदारों में हया!

अब बेज़ारों का शहंशाह 🙃

दुख होता...
कि आंखों से, सच्चा कलाम... किसी का ना!

ग़म, कमाया...
अब बेकार को कठिन हो रहा... खाना कमाना

पढ़ लो यार
तुम लोग...

यहां तो मैं,
अच्छा ही लगूंगा...

ना मुझसे
और सवाल पूछे जाएंगे

ना मेरी
हार, मार...

करवा सकेगी...

लब, खोलते ही... गूंगा

जब्त, बोलने से... पहले... होना...

-राहुल


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एक महीने पहले
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Manju Sharma

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