डर लग रहा है
फिर
हार को...
कैसे सहना है :(
'अरे, इस समय, ये सब कौन सोचता है?'
बड़ी मिन्नतों पे तो यहां एक मौका मिलता है...
कि
'उसी को भुनाओ!'
भटियार-ख़ाना... तो बहुत ठंडा लगता है...
जो ताप, दिमाग को, इस जवाबदारी ने दिया है
क्यों घाव, हृदय पे,
इश्क तारी में लिया है?
कुछ नहीं सीखा है!
फिर भी आपको ख़ुदा साथ देना है!
टूट चुके, बंदे का... हांथ, थामना है
-राहुल
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