घूम कर
लौट आऊं...
किताब के पास
बल्कि,
मैं कैसे कर रहा हूं...
लिखने का भी दुस्साहस?
कान में वो
गाना चल रहा है...
तन्हाई से निपटने का
होता हल क्या है?
मुझे अपनी
कसम याद है!
बस, वही वही
दोहरानी बात है
शुरुआत में डर, मन में हलचल, न्योतों की इंकार की ऐंठन...
स्वाभाविक है...
पर,
कवि नहीं भावुक है🤞
एक प्रिय सी तस्वीर... सम्मुख है...
नया नया, लगा दिल... अभी साबुत है...
-राहुल
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