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भाई से दुश्मनी

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जरा सी क्या कर ली हमने अपने भाई से दुश्मनी
        
                                                    
                            
दोस्त अब मेरा सारा जमाना हो गया
जो कल तक हमसे रहते थे दूर दूर
उनका रोज का मेरे घर आना जाना हो गया
जरा सी क्या कर ली हमने अपने भाई से दुश्मनी

सब बताने लगे मेरे मर्ज़ की दवा
पहले हमने नहीं देखा था ,
एक साथ इतना खुदा
मेरे घर रोज सजती है लोगों की महफिल
मेरा घर जैसे कोई मैखाना हो गया
जरा सी क्या कर ली हमने भाई से दुश्मनी

किस तरह यहां अपना रंग बदलते हैं लोग
आपके हिसाब से उनको यहां लगता है रोग
जरा सी हमसे चूक क्या हुई ,
मेरा दिल उनका निशाना हो गया
जरा सी क्या कर ली हमने अपने भाई से दुश्मनी

अब तो मेरा दोस्त है सारा मुहल्ला
अब मैं अपने घर को खुला छोड़ देता हूं
नही लगता हूं कोई ताला
अरसा हो गया मुझको कोई दवा लिए
मुहल्ले का हर घर मेरे लिए दवाखाना हो गया
जरा सी क्या कर ली हमने अपने भाई से दुश्मनी

अब तो सोचता हूं , फंसा हूं किस झमेला में
जैसे कोई बंदा खो जाता है किसी मेला में
एक साथ मेरे इतने रहनुमा ,कैसे मेरी जान बचेगी
अब तो मुश्किल खुद को बचाना हो गया
जरा सु क्या कर की अपने भाई से दुश्मनी
-रविन्द्र अमन
एक घंटा पहले
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