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बदल जाता है सब कुछ

Professor Ravindra Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झोंके ! कितना बेमुरौव्वत है तू !
        
                                                    
                            
हाँ , और क्या यार !
उड़ा डाले वसन और आशियाँ !
याद है कहा था तुझे ज़िगरी
मैंने उस दिन ,
और फिर , आज दिन ढले
हुआ क्या !
अरे , अरे ,सुनो
बदल जाता है सब कुछ
क्या तुम नहीं ?
हैरत , परेशानी… और भी …
2 घंटे पहले
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