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अंदाज़ ए उल्फत

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इलाज़ ए दर्द लाख सितम तू मुझ पर करे फिर भी बगैर तेरे जीना मेरा मुश्किल है याद तुझे करना मेरे लिए जरूरी है
        
                                                    
                            
घुट घुट कर जी रहा कैसे और इल्जाम मुझ पर कैसा अपनी बेखुदी में खोए हुए हो तुम समझाना मेरे लिए जरूरी है
ना तुम अच्छा कर सके हमें कभी ना मैं अच्छा हो सका राज़ ए दिल तेरा गर बुरा न मानो समझना मेरे लिए जरूरी है
तुम अपनी बात कहो गर जान मुझसे मांगो दिल मेरा हाजिर है और जानता हूं ये तुम कर सकते नहीं सोचना जरूरी है
दम ए आखिर अब और ना दो दर्द मैं बेवफा हो सकता नहीं बात दिल की मेरी तुम मान भी लो कहना तुमसे जरूरी है
11 घंटे पहले
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