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अंदाज़ ए नाकाम इरादा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये कैसी मुलाकात है जो बात दिल से कभी नहीं होती मैं अपने गम से कर रहा तौबा और तुम्हें फिक्र नहीं होती
        
                                                    
                            
बात दिल की कह दी मैने दर्द ये दरमियां गुफ्तगू नजर में नजर मिला कर जब चाहा मैने तुम्हें असर होती नहीं
गुजार कर गर्दिश ए हालात किसी तरह जी लूंगा मैं आदत से होकर मजबूर एहसास भी तो मात होती नहीं
दुख के बादल छाए हैं गम उठने लगे घनघोर घटाओं की तरह बेचैन दिल को चैन कहां बरसात तो होती नहीं
गीत वफा का गा कर दिल अपना बहला रहा मैं इजहार ए दर्द करूं तुमसे कैसे सच ये भी करामात होती नहीं
डूब कर गम में बात दिल की नहीं हो पाई तुमसे कभी कहूं दर्द कैसे किया कोशिश बहुत मुलाकात होती नहीं
एक घंटा पहले
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S. L.

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