ये कैसी मुलाकात है जो बात दिल से कभी नहीं होती मैं अपने गम से कर रहा तौबा और तुम्हें फिक्र नहीं होती
बात दिल की कह दी मैने दर्द ये दरमियां गुफ्तगू नजर में नजर मिला कर जब चाहा मैने तुम्हें असर होती नहीं
गुजार कर गर्दिश ए हालात किसी तरह जी लूंगा मैं आदत से होकर मजबूर एहसास भी तो मात होती नहीं
दुख के बादल छाए हैं गम उठने लगे घनघोर घटाओं की तरह बेचैन दिल को चैन कहां बरसात तो होती नहीं
गीत वफा का गा कर दिल अपना बहला रहा मैं इजहार ए दर्द करूं तुमसे कैसे सच ये भी करामात होती नहीं
डूब कर गम में बात दिल की नहीं हो पाई तुमसे कभी कहूं दर्द कैसे किया कोशिश बहुत मुलाकात होती नहीं