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अपने राष्ट्र उत्थान हेतु, जन जन को जगना चाहिए।

pravin kumar

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                            पहले रोटी कपड़ा मकान की लड़ाई थी,
        
                                                    
                            
आज एआई , मंगल मिशन और होड़ मिसाइल की।
ये सब उपलब्धि कुछ गर्व हमे कराती हैं,
लेकिन कुछ खामियां हमे आईना भी दिखाती हैं।
जातिवाद और क्षेत्रवाद अब ना हमसे सुलझ रहे हैं,
राजनीतिक आरक्षण से विकराल द्वंद में उलझ रहे ।
गबन,चोरी रिश्वतखोरी सम्हलना मुश्किल लगता है,
लचक क़ानून हमारा है ,जिसका दुरुपयोग बढ़ता है।
सब कुछ डिजिटल होने से भी काम नहीं चलने वाला,
जब तक धरातल की गहराई में नहीं कोई उतरने वाला।
सत्य सनातन , संस्कृति का हनन जोरों पर है ,
शिक्षा हुई दिखावे की विज्ञापन शोरों पर है।
हम केवल आसक्त हुए टाटा , बाटा डाटा,में,
मोबाइल की अनुरक्ति ले चली हमे अब घाटा में,
कर्तव्यों से पीछे हटके जहर जमी में घोल दिया है,
रिश्तों का तो मोल नही है पर सोशल दुनिया बोल रहा है।
अपने नैतिक मूल्यों का हनन नहीं करना चाहिए,
अपने राष्ट्र उत्थान हेतु, जन जन को जगना चाहिए।
2 महीने पहले
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