कमी रही तो होगी कुछ प्यार भरी उन बातों में,
बात नहीं मिलती जो अब तेरी मेरी बातों में।
जब पूछा तुझसे कि कब से ये नफ़रत मेरे साथ है,
तू साथ नहीं है आज मेरे, पर यादें तेरी साथ हैं।
मैं सह लूंगा सब कुछ, लेकिन ये याद तेरी तड़पाती है,
मैं दूर भी होना चाहता हूँ, तो पास मुझे ले आती है।
हर पल तेरी ही यादों में मैं खोया-खोया रहता हूँ,
आती तो होगी नींद तुझे, मैं आधा सोया-सा रहता हूँ।
तू नफ़रत करती जा मुझसे, मैं प्यार तुझी से करता हूँ,
दिन-रात तेरे ही बारे में मैं कविता लिखता रहता हूँ।
मैं ख़त तो लिखता हूँ लेकिन वो तुझ तक पहुँच नहीं सकता,
मेरी आँखों का आँसू बहकर तेरे दिल तक पहुँच नहीं सकता।
मुझे याद अभी भी है वो बचपन, जब सब कुछ अच्छा होता था,
कुछ हो या ना हो पास मेरे, पर साथ तो तेरा होता था।
गर हुई ख़ता तो बता मुझे, मैं ठीक उसे ही कर दूँगा,
एक बार पास तो आ मेरे, मैं बाहों में भी भर लूँगा।
दिल ना माने अब अभी तेरी, तो दिक़्क़त कोई मत लेना,
था पागल आशिक कोई, वो ये सोच भुला मुझे देना।
बस कर देना एहसान यही कि सूरत कभी मत दिखाना,
मैं वो ही पागल आशिक हूँ, मेरी गली में मुड़ कर मत आना।