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सेवा किया जा

Pranab Mandal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्वार्थी दुनिया,
        
                                                    
                            
अतार्किक लोग,
आत्मकेंद्रिकता से भरपूर
पर प्रेम उनसे करना जरूर.

निंदुक का तो काम हैं निंदा,
आप बुरा करो या करो अच्छा.
सफलता का पैमाना यही हैं,
दोस्त झूटे और दुसमन सही हैं.

भलाई करना सेवक का धर्म हैं,
भुला दें जो दुनिया का कर्म हैं.
सेवक बनो सुन आत्मा की पुकार
आपना सर्बश्रेष्ठ दो जो हैं हक़दार.
काम करो बिन फल की परवाह,
संतोष्टि दे जो काम हो मन चाह.
सब खुश रहे यह सोच ही व्यर्थ हैं
इस जीवन का बस यही यथार्थ हैं.
 
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4 वर्ष पहले
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