विज्ञापन

किस बात का अभिमान

Pranab Mandal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झूठी बातों को जोर से कहना,
        
                                                    
                            
दोहराना बारम्बार,
उस से अच्छा हैं चुप ही रहना,
न विवाद न प्यार.

छल करित से साजिश रचना,
जीतना हैं हरबार.
उस से बेहतर हार मान लेना,
क्यों झूठी तकरार.

दूसरों को सदा मुर्ख समझना,
नहीं ज्ञान का पहचान.
बात बात पर लड़ना झगड़ना,
नहीं वीरों का शान.

चलने के लिए सन्मार्ग को चुनना,
कहलायें वो विद्वान,
प्रेम भाव से हैं सभी से मिलना,
किस बात का अभिमान.

स्वरचित
पी. के. मंडल
जबलपुर

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

1 कविता

View Profile