झूठी बातों को जोर से कहना,
दोहराना बारम्बार,
उस से अच्छा हैं चुप ही रहना,
न विवाद न प्यार.
छल करित से साजिश रचना,
जीतना हैं हरबार.
उस से बेहतर हार मान लेना,
क्यों झूठी तकरार.
दूसरों को सदा मुर्ख समझना,
नहीं ज्ञान का पहचान.
बात बात पर लड़ना झगड़ना,
नहीं वीरों का शान.
चलने के लिए सन्मार्ग को चुनना,
कहलायें वो विद्वान,
प्रेम भाव से हैं सभी से मिलना,
किस बात का अभिमान.
स्वरचित
पी. के. मंडल
जबलपुर
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