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आज़ादी कहाँ

Pranab Mandal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सात दशक हो चला हैं, इंतजार की घड़ी,
        
                                                    
                            
न जाने कब आयेगा, आज़ादी हमारी.
स्वयं में सब उलझे हैं, क्या नेता क्या पीर,
जनता दुखी घूम रही, पुरुष हो या नारी.

पी. के. मंडल.

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4 वर्ष पहले
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