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बच्चे बड़े हो गए

Pragya Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हज़ार मसले घर में खड़े हो गए
        
                                                    
                            
जब मां बूढ़ी और बच्चे बड़े हो गए

हर बात पे ज़िद करते थे जो
उनको बरसों मां से लड़े हो गए

पीज़ा बर्गर फास्ट फूड अब खाते हैं
रसोई से गायब पकोड़े दही बड़े हो गए

मम्मी मम्मी कह कर लिपट जाते थे जो
मिलने आने पे बस मुस्कुरा के खड़े हो गए

मां सुलझाती थी जिनकी हर उलझन
उनके लिए ज़रूरी दोस्तों के मशवरे हो गये

अब तो बस अपने आप में सिमटा रहता है बेटा
बहुत समय मां को सर पे हाथ धरे हो गए

आओ मां बैठो ना पास मेरे
बेटे को अरसा ऐसा कहे हो गए

साथ साथ खाते थे हंसते बोलते बतियाते थे
अब बेटे की सूरत देखने वास्ते मां के रतजगे हो गए

सन्नाटा सा पसरा रहता है हरदम
नाराज़ घर से कहकहे हो गए

बातों में तकल्लुफ होता है अब
फासले अब दरमियां हो गए

अब रोज ही लड़खड़ते कदमों से आते हैं घर
जब से बच्चे अपने पावों पे खड़े हो गए

प्रज्ञा पाण्डे (मनु)
वापी गुजरात
4 वर्ष पहले
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