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लोक गायन का है संरक्षण ज़रूरी

Pradeep Mukherjee

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                            सुमधुर कजरी गीत
        
                                                    
                            
पड़ते थे सुनाई कानों में
सावन के महीने में ही
आज भी सुनाई पड़ते हैं ये गीत
लेकिन कजरी गायन
की परंपरा
जो थी पहले काफी समृद्ध
अब पड़ती जा रही है क्षीण वो
असल में
कजरी शब्द की उत्पत्ति
हुई थी
कजरा यानी काजल शब्द से
जो प्रतीक है
मानसून के काळा-कजरारे
बादलों का
लोक गायन की परंपरा को
बचाकर रखना
है बहुत ज़रूरी
इसके लिए होना चाहिए
बड़ा काम
लोक गायन के संरक्षण
पर
इसके लिए करना चाहिए
सरकार को भी
सार्थक काम।
- डॉ. प्रदीप कुमार मुख़र्जी
2 महीने पहले
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