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आज मानव खुद को ही विनाश की ओर है धकेल रहा

Poonam Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज मानव खुद को ही,
        
                                                    
                            
विनाश की ओर है धकेल रहा 
लालच और फरेब का
चारों तरफ जाल है बुन रहा 
खुद को सबसे आगे
रखने की होर में 
दूसरे को पैरों तले है रौंद रहा 
नतीजा प्रदूषण की चपेट में
सारा विश्व है घिर रहा 
जिसके कारण मानव का 
दम है घुट रहा
कितने लोग हर साल
प्रदूषण की चपेट में है मर रहे
बेचारी हवा अपने पुराने दिन
को याद कर है रो रही 
कब आएंगे वह प्यारे दिन
और रातें वह सपने है सजा रही
कब जागेगा इंसान 
कब होगी उसकी आत्मग्लानि 



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