ठोकर खाकर तो कई बार उठ सकते हैं।
नज़रों से गिरकर संभलना बड़ी बात है।।
उड़कर तो परिन्दे भी छू लेते हैं बुलंदियां।
ज़मीं से आसमान चूमना बड़ी बात है।।
मुक़ाम टूटे मार्गों से भी हासिल होगा पर।
लीक से हटकर नई राह बनाना बड़ी बात है।।
इस दौर की स्वार्थी सफलता का त्याग कर।
अपनी हार से दुनिया को जीताना बड़ी बात है।।
हाल-ए-दिल अंदाज-ए-बयां सबको है मालूम।
अल्फ़ाज़ों को समेटकर ग़ज़ल कहना बड़ी बात है।।
रिक्वेस्ट, अनफ्रेंड, ब्लॉक ये सब तो फैशन है।
मुरझाए फूल किताबों में मिलना बड़ी बात है।।