विज्ञापन

मैं हिन्दू हूँ

Pankaj Ghildiyal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं हिन्दू हूँ, सावन के सोमवार में भी ईद की बात करता हूँ,
        
                                                    
                            
अगर यही मंजूर है, तो मै मंदिरों से मस्जिदों तक दुआ पढ़ता हूँ,
मैं हिन्दू हूँ, वसुधैव कुटुम्बकम की बात करता हूं,
दर्द से सहमे मेरे कश्मीर के लिये, अमरनाथ से दुआ भेजता हूँ।

हां मैं हिन्दू हूँ, इसलिए सनातन धर्म की बात करता हूँ


मैं हिन्दू हूँ, शम्भू से महाकाल तक के रूप को पूजता हूँ,
भस्म लगता हूँ देह पर, और महा मृत्युंजय भी पढ़ता हूँ,
बांटता हूँ दुवाएँ ईद में भी अपने भाइयों को,
क्रिसमस में भी सबको गले लगता हूँ।

हाँ मैं हिन्दू हूँ, इसलिए जब अपना कहूँ समझो सबकी बात करता हूँ।

मैं हिन्दू हूँ,मैैैं अमन और चैन की बात करता हूँ,
इस विकट समय  में भी, निकट हो वो बात करता हूँ,
तेरी दुवाओं में मेरा नाम हो, मेरी प्रार्थना में तू रहे,
हिन्दुस्तान के अंदर इस भाईचारे की बात करता हूँ,

हाँ मैं हिन्दू हूँ, अपनी जुबान से तेरी दिल की बात करता हूँ

मैं हिन्दू हूँ, खुले दिल से ये ऐलान करता हूँ,
अगर इन पंक्तियों को सही समझ सको तो इन्हें पढ़ लेना,
मैं आज इस सावन में ईद की मिठाई,
और ईद में सावन के कांवड़ देखना चाहता हूँ।

हाँ मैं हिन्दू हूँ, प्यार हिन्दुस्तां देखना चाहता हूँ।

पंकज घिल्डियाल (आज़ाद)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12479 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile