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हम जिन्हें भुला बैठे

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम जिन्हें भुला बैठे,
        
                                                    
                            
वो फिर सामने आ गए।
हमें जुस्तजू की जुर्रत नहीं,
क्यों साथ निभाने आ गए?
जीवन से निकाल दिया जिनको,
वो फिर सताने आ गए।
अब हमसे क्या चाहते हैं वो?
मौसम की तरह बदलने आ गए।

- चंद्र दत्त शर्मा
13 घंटे पहले
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