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दोनों जहाँ के चांद

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक चांद जमीं पर, दूसरा आसमान में,
        
                                                    
                            
कौन कस से कह दे कि पास आ जा ?

निकला है चांद अपने पूरे शबाब पर,
फीका पड़ गया दूसरे चांद को देखकर।

दोनों जहाँ के चांदों की,
बराबरी कहां हो पाती है?
एक स्थाई है...,
तो दूसरा अस्थाई है,
फिर भी एक दूसरे की,
जरूरत पड़ जाती है।
-चंद्र दत्त शर्मा
5 घंटे पहले
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