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धुँआ निकलते ही.....

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धुँआ निकलते ही आग प्रज्वलित हो जाती है,
        
                                                    
                            
भोर होते ही रोशनी जगमगा जाती है।
बड़े कठिन रास्ते हैं जीवन के,
अच्छी डगर भी अपने रास्ते से हट जाती है।
कभी कभी नहीं मिलती मंजिल,
सोचते सोचते जिंदगी भी बीत जाती है।
किसी के करने ना करने से कुछ नहीं होता,
बस और बस केवल अपना तन अपना साथी है।
-चंद्र दत्त शर्मा
एक महीने पहले
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