धुँआ निकलते ही आग प्रज्वलित हो जाती है,
भोर होते ही रोशनी जगमगा जाती है।
बड़े कठिन रास्ते हैं जीवन के,
अच्छी डगर भी अपने रास्ते से हट जाती है।
कभी कभी नहीं मिलती मंजिल,
सोचते सोचते जिंदगी भी बीत जाती है।
किसी के करने ना करने से कुछ नहीं होता,
बस और बस केवल अपना तन अपना साथी है।
-चंद्र दत्त शर्मा