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अपने अपने ख्वाबों पर

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने अपने ख्वाबों पर,
        
                                                    
                            
जब घूमती हैं निगाहें,
कुछ करते हैं पूरा,
कुछ छोड़ देते हैं अधूरा।
नासूर बन जाता है वही काम,
ना इधर के ना उधर के,
ये रास्ते भी हैं कठिन,
इनसे कोई गुजरा या ना गुजरा।
-चंद्र दत्त शर्मा
5 घंटे पहले
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