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कभी चाहत लिखा, कभी इबादत लिखा

Pablo Escobar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी चाहत लिखा, कभी इबादत लिखा
        
                                                    
                            
तेरी आँखों के हर इशारे को क़यामत लिखा ।।
दुनिया ने जब-जब पूछी तेरी पहचान,
हमने पहली सफ़ में खड़े हो कर मोहब्बत लिखा।।
यूँ तो आवारगी में मशहूर हैं मेरे क़िस्से,
पर जब भी मंज़िल पूछी गई मेरी, तो तेरी हिरासत लिखा ।।
तुझी से मिले हैं ज़माने के सारे दर्द-ओ-ग़म,
और दवा के नाम पर, तुझी को राहत लिखा ।।
- क्षितिज मिश्रा
एक महीने पहले
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