समय कुछ इस कदर बदला कि,
दिल ने भी यह मान लिया,
मिलना तो एक बहाना था,
तुम्हें मेरे करीब आना था।
सिलसिला यह कुछ महीनों का था,
मगर लगता था कि सदियां बीत गईं,
फांसले ऐसे दरमियां थे कि,
मिलना मुकम्मल ना था।
वो कहते हैं कि तुमको मैंने काबिल बनाया,
पत्थर से पारस बनाया......
बस तुमको अपने करीब न लाया।
वो कहते हैं तुम रोई क्यूं .....
हम कहते हैं वो गए क्यूं....
जब जाना ही था तो आए क्यों......?