देखिये क़िस्मत अयाँ होने को है
एक ज़र्रा आसमाँ होने को है
दिल की बस्ती में दिखी है रौशनी
फिर से कोई राइगाँ होने को है
दर्ज़ कीजे क़ाग़ज़ों पर हादसे
आँख से जो कुछ बयाँ होने को है
शोर है अंदर अजब जिद्द-ओ-जहद
ख़ामुशी मेरी ज़ुबाँ होने को है
फ़ैसला किस से करेंगे अब उदू
तीर जब ख़ुद ही कमाँ होने को है
ये सफ़र-नामा है आदम ज़ात का
लफ़्ज़-ए-कुन अब दास्ताँ होने को है
इश्क़ की आमद हुई है जश्न में
आज सहरा कहकशाँ होने को है