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सुधरे नहीं आज तक, लगता है चिकने घड़े हैं

Nishant Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर बनते काम में अड़ंगा डाले वो खड़े हैं
        
                                                    
                            
मुझे महसूस कराना चाहते हैं, वो बड़े हैं

महज़ दिखावटी तौर पर ही वो सबसे जुड़े हैं
अपनी ग़लत बात भी मनवाने पे वो अड़े हैं

चालाकियों के जंजाल में उलझे वो पड़े हैं
सुधरे नहीं आज तक, लगता है चिकने घड़े हैं

उनको समझाने की कोशिशें तो कई बार की
भौंहें सिकोड़ कर मुझसे कहे, तुमको तो तड़े हैं
- निशांत शुक्ल
 
7 महीने पहले
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