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भारतीय नारी

Nirmal Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भारतीय नारी अबला नहीं सबला होती है
        
                                                    
                            
भारत भूमि की वीरागांनाएं का चेहरा
इतिहास के पन्नों में झलकता है
सत्य युग का इतिहास को खोलो
या कलयुग के इतिहास से पूछ लो
इतिहास ही गवाह है
सभी इतिहासों में निर्णायक चेहरा
स्त्रियों का ही खिला है ।

सत्य युग की सती सावित्री धर्म युद्ध लड़ी थी
पतिव्रता की सीढ़ी पर खड़ी थी
आत्मविश्वास से लड़ी थी
अपने पति की प्राण बचाने
जीते जी स्वर्ग की सीढ़ी पर चढ़ी थी
यमराज के चंगुल से पति का प्राण वापस लाकर
सती सावित्री पतिव्रता नारी कहलायी थी ।

द्वापर युग की नारी द्रोपदी
अपनी आत्मसम्मान की बदला में
दुशासन की लहू से अपनी लटा धोयी
तेरह वर्ष की प्रतीक्षा के बाद
अपनी लटाओ को बांधी
अपनी आत्मसम्मान के लिए
कौरव कुल का विध्वंस की
अपनी झलकती चेहरा से
महाभारत ग्रंथ रची ।

कलयुग की नारी ना रही पीछे
अपनी आत्मसम्मान के लिए
पद्मावती ने कदम उठाई
अपनी सूरत की एक झलक खिलजी को ना दिखाई
बल से नहीं कल से खिलजी को दंडित की
सखियों के संग जोहर कर
सती सावित्री पत्नी धर्म निभाकर
अलाउद्दीन खिलजी को मात दी ।

भारत की वीरांगनाएं नारी सती हीं नही
बल्कि ज्वालामुखी का भी रूप दिखी
अपनी आन बान शान से इस धरती की लाज रखी
झांसी की रानी भारत के आत्मसम्मान बचाने के लिए
कितने अंग्रेजी को मिट्टी में मिला कर
भारत मां की रक्षा के लिए
अपनी प्राण कुर्बानी की
हर भारतीय की जुबान में अपना नाम की
भारत की नारी वीरांगनाएं थी
वीरांगनाएं है और वीरांगनाएं रहेगी
अपनी आत्मसम्मान की रक्षा में दुर्गा भी बनेगी॥

(रेखा भारती -निर्मल ठाकुर )
(बनासो हजारीबाग झारखंड)
 
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4 वर्ष पहले
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